अपने-अपने कबीर

-घनश्याम मैथिल ‘अमृत’ जैसे ही मस्जिद के लाउडस्पीकर से तेज आवाज में अजान शुरू हुई, पास ही बने मंदिर में बैठे पुजारी पंडित रामदीन बुरा सा मुंह बना कर अपने…

आइना  रोज    देखता   हूं   मैं

- संजीव सागर इक  सिवा  तेरे  अब नहीं दिखता,है  मगर  मुझको रब नहीं दिखता। हर  तरफ  है  बहार   का  मौसम,क्या करूं मैं वो सब नहीं दिखता। है नजारा  तिरा…

ओटीटी मंचों पर भी देखिए जासूसी फिल्में

नई दिल्ली। साहित्य के पन्नों से होता हुआ कोई जासूस अपने कारनामे रूपहले पर्दे पर दिखाता है तो वह दर्शकों का ध्यान खींच ही लेता है। वहीं दूसरी ओर कई…