अनुसंधान डेस्क
कृत्रिम मेधा (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के अत्यधिक आधुनिक होने से भविष्य का एआई सिस्टम मानवता के लिए बड़ा खतरा बनकर उभर सकता है। दुनिया के सबसे एडवांस एआई सिस्टम को मूल डेवलपर्स से चुराया जा सकता है और फिर उसे उसी के खिलाफ हथियार बनाया जा सकता है। यह तकनीक जब से आई है, तभी से हर तरफ इसी बात की चर्चा है कि भविष्य में एआई लोगों के लिए खतरा बन सकता है।
अब हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट में भी इसी बात का दावा किया गया है कि एआई मानवता के लिए एक बड़ा खतरा है और इससे इंसानों का अस्तित्व भी खतरे में है। ग्यारह मार्च 2024 को प्रकाशित रिपोर्ट को ग्लेडस्टोन ने तैयार किया है। इसमें बताया गया है कि एआई की वजह से आने वाले समय में इंसानों का अस्तित्व पूरी तरह से विलुप्त हो जाएगा।
आप कह सकते हैं कि एआई बड़ी काम की चीज है, लेकिन इस पर लगाम कसना बेहद जरूरी है, वरना यह विनाश का कारण बन सकता है। आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस को लेकर सुरक्षा नीति पर काम किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य के खतरों से बचा जा सके।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के लिए यह भी कहा जा रहा है कि इसकी वजह से चिकित्सा क्षेत्र में क्रांति आएगी। बड़ी और बहुराष्ट्रीय तकनीकी कंपनियां हेल्थकेयर में एआई के उपयोग के लिए अधिक धन निवेश कर रही हैं। उदाहरण के लिए, माइक्रोसॉफ्ट ने स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए चार करोड़ डॉलर के कार्यक्रम की घोषणा की। हालांकि एआई निसंदेह स्वास्थ्य सेवा उद्योग को बदल रहा है लेकिन इसके खतरे लोगों को सहज दिखाई नहीं पड़ रहे।
यह तकनीक अब भी अपेक्षाकृत नई और अनेक शंकाओं से भरी है। यही नहीं जिस भी क्षेत्र में एआई का प्रयोग बढ़ेगा, वहां नौकरियों पर मार पड़ेगी और आशंका है कि बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो सकते हैं।
आंकड़े कहते हैं कि स्वास्थ्य सेवा उद्योग में सालाना लगभग 200 अरब डॉलर बर्बाद होते हैं। इसी में डाक्टर, नर्स और कर्मचारियों की तनख़्वाह भी है। यानी एआई के प्रयोग से बड़े पैमाने पर बेरोजगारी बढ़ेगी। स्वाभाविक है कि इस बेरोजगारी का समाज और बीमारियों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा।
तकनीक के रूप में भले ही एआई एक वरदान लग रहा हो, लेकिन चिकित्सा क्षेत्र में बराबर मानवता और सहानुभूति की जरूरत है। उदाहरण के लिए रोबोट तकनीकी सर्जरी कर सकता है लेकिन उसमें मानवीयता और सहानुभूति नहीं होगी। रोबोट आपका ऑपरेशन तो कर सकता है, लेकिन आपका दुख नहीं सुन सकता। एआई के दौर में बीमार मनुष्य जिंदा लाश की तरह होंगे। (स्रोत : हील इनिशिएटिव)
