तुम्हारी यादों का जो तिलिस्म है
-संतोषी बघेल तुम्हारी मुस्कुराहटों में लिपटी हैमेरी आंखों की नमी,मेरे शब्दों में उकरते प्रेम मेंतुम्हारे विराग की कसक है,कभी पिघलती हूं तुम्हारे खयाल से,कभी तुम्हारा प्रणमुझे कठोर बना जाता है।…
जासूस जिंदा है, एक कदम है जासूसी लेखन की लुप्त हो रही विधा को जिंदा रखने का। आप भी इस प्रयास में हमारे हमकदम हो सकते हैं। यह खुला मंच है जिस पर आप अपना कोई लेख, कहानी, उपन्यास या कोई और अनुभव हमें इस पते jasooszindahai@gmail.com पर लिख कर भेज सकते हैं।
-संतोषी बघेल तुम्हारी मुस्कुराहटों में लिपटी हैमेरी आंखों की नमी,मेरे शब्दों में उकरते प्रेम मेंतुम्हारे विराग की कसक है,कभी पिघलती हूं तुम्हारे खयाल से,कभी तुम्हारा प्रणमुझे कठोर बना जाता है।…
जब मन में भाव उमड़ते हैं तो शब्दों के माध्यम से कागज पर उतरते हैं। उन शब्दों को पढ़ कर फिर कुछ भाव उमड़ते हैं, तब मन में विचारों की…
- डा. शशि रायजादा लखनऊ। लगभग ढाई सौ से ऊपर जासूसी उपन्यास लिखने वाले अपने समय के चर्चित लेखक असरार अहमद उर्फ इब्ने सफी इलाहाबाद जिले के नारा कस्बे में…