दिलों की चारागरी करता इक शायर
पुस्तक समीक्षा साहित्य डेस्कनई दिल्ली। कोई सात साल पहले आलोक यादव का ग़ज़ल संग्रह ‘उसी के नाम’ आया था। तब कौन जानता था कि वे इतने अल्प समय में वे…
जासूस जिंदा है, एक कदम है जासूसी लेखन की लुप्त हो रही विधा को जिंदा रखने का। आप भी इस प्रयास में हमारे हमकदम हो सकते हैं। यह खुला मंच है जिस पर आप अपना कोई लेख, कहानी, उपन्यास या कोई और अनुभव हमें इस पते jasooszindahai@gmail.com पर लिख कर भेज सकते हैं।
पुस्तक समीक्षा साहित्य डेस्कनई दिल्ली। कोई सात साल पहले आलोक यादव का ग़ज़ल संग्रह ‘उसी के नाम’ आया था। तब कौन जानता था कि वे इतने अल्प समय में वे…